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संकà¥à¤°à¤®à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ है?
अधिकांश बीमारी का मूल कारण किसी à¤à¥€ तरह संकà¥à¤°à¤®à¤£ से संबंधित होता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ का निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ पहलू शरीर के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• अवांछित जीव के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ की बात करता है जो अंत में मानव शरीर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है। ये जीव मूल रूप से परजीवी होते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवित रहने के लिठà¤à¤• अलग शरीर की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। मानव शरीर पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ करने, बनाठरखने और यहां तक कि उपनिवेश बनाने के लिठउनका आवास बन जाता है। इन हानिकारक जीवों को रोगजनक कहा जाता है। ये अतà¥à¤¯à¤‚त कà¥à¤¶à¤², अपनाने में तेज और संखà¥à¤¯à¤¾ में गà¥à¤£à¤¾ करने वाले होते हैं। फंगस, वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ मिलकर अनगिनत पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करते हैं। जहां कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ हलà¥à¤•े होते हैं और जीवन के लिठà¤à¤¸à¤¾ कोई खतरा पैदा नहीं करते हैं, वहीं कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ गंà¤à¥€à¤° हो जाते हैं और अकà¥à¤¸à¤° उपचार में ततà¥à¤•ालता के साथ जीवन के लिठखतरा बन जाते हैं।
मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से चार पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ होते हैं जो आम तौर पर मानव को सबसे अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। वायरस के कारण होने वाला वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ सबसे आम संकà¥à¤°à¤®à¤£ है और 50,000 से अधिक वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की खोज की जा चà¥à¤•ी है। वायरस à¤à¤• शरीर में आकà¥à¤°à¤®à¤£ करता है और जलà¥à¤¦à¥€ से à¤à¤• कोशिका में सà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाता है। नहीं, जलà¥à¤¦ ही वे कोशिका में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं, आनà¥à¤µà¤‚शिक सामगà¥à¤°à¥€ की रिहाई उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हजारों में गà¥à¤£à¤¾ करने में सकà¥à¤·à¤® बनाती है। वायरस की तरह à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€ और ईबीवी सेल को जबरदसà¥à¤¤à¥€ à¤à¤• अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ संखà¥à¤¯à¤¾ में दोहराते हैं जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प कैंसर का जनà¥à¤® होता है। दूसरी ओर, कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ सामानà¥à¤¯ सरà¥à¤¦à¥€, à¤à¤¨à¥à¤¸à¥‡à¤«à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस, इनà¥à¤«à¥à¤²à¥‚à¤à¤‚जा, à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€, डेंगू बà¥à¤–ार और बहà¥à¤¤ कà¥à¤› हैं।
पà¥à¤°à¥‹à¤•ैरियोटà¥à¤¸ के रूप में जाना जाने वाला जीवाणॠसूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µ अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर कबà¥à¤œà¤¾ कर लेता है और पृथà¥à¤µà¥€ के पूरे बायोमास में अपनी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ कर लेता है। अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• गरà¥à¤®à¥€, ठंड और रेडियोà¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ कचरे के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ होने के कारण बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैजा, निमोनिया, डिपà¥à¤¥à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£, टाइफाइड, टीबी और बहà¥à¤¤ कà¥à¤› जैसी बीमारियों का कारण बना रहता है।
51 मिलियन से अधिक पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कवक की à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प मानव शरीर में तà¥à¤µà¤šà¤¾ और आंखों के संकà¥à¤°à¤®à¤£, दाद, वैली फीवर और à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ जैसे कई संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ संकà¥à¤°à¤®à¤£ आमतौर पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नà¥à¤•सान नहीं पहà¥à¤‚चाता है, लेकिन अगर असामानà¥à¤¯ आकार में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है तो अंततः मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के संवेदनशील हिसà¥à¤¸à¥‡ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाता है और साथ ही नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® को गंà¤à¥€à¤° रूप से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
चार पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤• मेजबान के शरीर में रोगजनकों के आकà¥à¤°à¤®à¤£ और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पैदा करने का परिणाम है। आकà¥à¤°à¤®à¤£à¤•ारी रोगज़नक़ के पà¥à¤°à¤•ार के आधार पर, संकà¥à¤°à¤®à¤£ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित चार पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं:
वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£: रोगजनक वायरस के कारण होता है। उदाहरण के लिठकोविड -19, à¤à¤¨à¥à¤¸à¥‡à¤«à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, पोलियो, आदि।
जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£: बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है। जैसे टीबी, टाइफाइड आदि।
फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£: कवक के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है। जैसे कैंडिडिआसिस, à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ आदि।
पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ रोग: निरà¥à¤œà¥€à¤µ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यानि पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ के कारण होता है। उदाहरण के लिठकà¥à¤°à¤¯à¥‚तà¥à¥›à¤«à¥‡à¤²à¥à¤¡à¤Ÿ-जाकोब रोग आदि।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के पांच लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
संकà¥à¤°à¤®à¤£ तब होता है जब à¤à¤• रोगज़नक़ शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करता है और उसमें कà¥à¤› अवांछित परिवरà¥à¤¤à¤¨ करता है। à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ के पांच लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में बà¥à¤–ार शामिल है जो सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, ठंड लगना और पसीना, पेशाब में वृदà¥à¤§à¤¿, सांस की तकलीफ और गले में खराश, या à¤à¤• नया मà¥à¤‚ह का दरà¥à¤¦à¥¤ इनमें से किसी à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ की ततà¥à¤•ाल आवशà¥à¤¯à¤•ता को इंगित करती है।
आपको कैसे पता चलेगा कि कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ गंà¤à¥€à¤° है?
किसी à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£, जैसे घाव, को गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कहा जा सकता है यदि यह कà¥à¤› संकेत और लकà¥à¤·à¤£ दिखाता है जैसे कि बड़ा, गहरा या दांतेदार किनारों का होना, घाव के किनारों का अलग होना, घाव से कोई सà¥à¤°à¤¾à¤µ, बà¥à¤–ार, दरà¥à¤¦ या सूजन बढ़ जाना, घाव का कारण किसी दूषित वसà¥à¤¤à¥ से काटना या चोट लगना और घाव की ठीक से सफाई न होना। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में, जितनी जलà¥à¤¦à¥€ हो सके चिकितà¥à¤¸à¤¾ परामरà¥à¤¶ को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी जानी चाहिà¤à¥¤
संकà¥à¤°à¤®à¤£ का इलाज कैसे किया जाता है?
कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ जो आमतौर पर संकà¥à¤°à¤®à¤£ के जनà¥à¤® पर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं, पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के आसपास दरà¥à¤¦, सूजन या गरà¥à¤®à¥€, लगातार बà¥à¤–ार, तरल पदारà¥à¤¥ की निकासी और अकà¥à¤¸à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से लाल धारियाठनिकलती हैं। आपके शरीर में किसी à¤à¥€ असामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ का अनà¥à¤à¤µ होने पर, आपको अपने फैमिली डॉकà¥à¤Ÿà¤° से चेक-अप करवाना चाहिà¤à¥¤ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को अनदेखा करना लंबे समय तक हानिकारक हो सकता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण का पता लगाना अतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनमें से कà¥à¤› को अगर अनदेखा किया गया तो वे घातक बीमारी का कारण बन सकते हैं।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सामना किठजा रहे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ जानकारी मांगते है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के मामले में, वह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखता है और सटीक कारण का निदान करने के लिठसूकà¥à¤·à¥à¤®à¤¦à¤°à¥à¤¶à¥€ का उपयोग à¤à¥€ कर सकता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको कà¥à¤› परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ के लिठà¤à¥€ कह सकते हैं जो कारण का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करते है और इस पà¥à¤°à¤•ार डॉकà¥à¤Ÿà¤° को उसी के लिठउचित उपचार करने में मदद करती है। परीकà¥à¤·à¤£ के परिणाम के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, डॉकà¥à¤Ÿà¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ लिखते है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के लिठकौन पातà¥à¤° है? (उपचार कब किया जाता है?)
किसी à¤à¥€ असामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ से पीड़ित लोगों को परामरà¥à¤¶ के लिठपहà¥à¤‚चने की सलाह दी जाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अधिकांश रोग की जड़ें रोगाणà¥à¤“ं और रोगजनकों के कारण होने वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£ में होती हैं।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के लिठकौन पातà¥à¤° नहीं है?
जो लोग फिट और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हैं और किसी असामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ से पीड़ित नहीं हैं वे उपचार के लिठपातà¥à¤° नहीं हैं या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं है।
आपको संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठअसà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² कब जाना चाहिà¤?
किसी के शरीर में कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• परिवरà¥à¤¤à¤¨ यानी संकà¥à¤°à¤®à¤£ से संबंधित कोई à¤à¥€ संकेत और लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देना असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² जाने का कारण है। इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में बà¥à¤–ार, शà¥à¤µà¥‡à¤¤ रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की संखà¥à¤¯à¤¾ में कमी, सांस की तकलीफ, दरà¥à¤¦ की नई शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ और नाक बंद होना शामिल हैं। इनमें से किसी का à¤à¥€ हमारे शरीर में होना संकà¥à¤°à¤®à¤£ के खतरे की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है।
कà¥à¤¯à¤¾ कोई à¤à¥€ दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हैं?
संकà¥à¤°à¤®à¤£ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं। वहीं, डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताई गई दवाà¤à¤‚ कई तरह के दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के साथ आती हैं। à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ उलà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿, मतली, बà¥à¤–ार, शà¥à¤·à¥à¤• गले, जीठपर सफेद रंग के धबà¥à¤¬à¥‡, अचानक योनि में खà¥à¤œà¤²à¥€ और निरà¥à¤µà¤¹à¤¨ और यहां तक कि दसà¥à¤¤ और पेट दरà¥à¤¦ à¤à¥€ हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ होता है यदि कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ हो जाता है?
यदि किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£ का सही समय पर इलाज नहीं किया जाता है या अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ रहता है, तो यह अधिक गंà¤à¥€à¤° जटिलताओं के विकास या मौजूदा लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बिगड़ने का कारण बन सकता है। जैसे अगर हम जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ के मामले पर विचार करते हैं, अगर इसे अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो यह सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸, à¤à¤• चरम सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के साथ-साथ à¤à¤• बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° जटिलता à¤à¥€ हो सकती है जो घातक à¤à¥€ साबित हो सकती है।
à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ कितने समय तक चल सकता है?
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बने रहने तक की अवधि लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के कारणों और गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करती है। जैसे अगर हम वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ के मामले पर विचार करें, तो लकà¥à¤·à¤£ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दिन से 14 दिन या उससे à¤à¥€ अधिक समय तक जारी रह सकते हैं और यह काफी सामानà¥à¤¯ है। खांसी के मामले में, यह अवधि गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ के आधार पर 3 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ या उससे अधिक तक बढ़ सकती है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के बाद दिशानिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
केवल डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ उपचार का पालन करने से आप निकट à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ नहीं रहते है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• संचारी होते हैं और फिर से होने की उचà¥à¤š संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ पर कबà¥à¤œà¤¾ कर लेते हैं। आपको कà¥à¤› निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ आदतों को बनाठरखना चाहिठजो संकà¥à¤°à¤®à¤£ की किसी à¤à¥€ घटना से बचने में मदद कर सकें। इनमें बचपन में माता-पिता और शिकà¥à¤·à¤•ों से सीखी गई सामानà¥à¤¯ आदतें शामिल हैं। उनमें से कà¥à¤› में हाथ धोना, टीकाकरण लेना और संकà¥à¤°à¤®à¤£ की चपेट में आने से बचना, सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ और सफ़ाई शामिल है। इसके अलावा, आपको कà¤à¥€ à¤à¥€ दूसरों की अनà¥à¤¯ चीजों को साà¤à¤¾ या उपयोग नहीं करना चाहिà¤, जो संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैलाने का à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤°à¥‹à¤¤ बनी हà¥à¤ˆ हैं। इसके अलावा, आपको उपचार के दौरान पूरà¥à¤£ आराम करना चाहिठऔर अपने शरीर को अपने शरीर में रोगाणॠसे लड़ने देना चाहिà¤à¥¤
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के ठीक होने में कितना समय लगता है?
हलà¥à¤•े संकà¥à¤°à¤®à¤£ को ठीक होने में आमतौर पर 1 या 2 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ लगते हैं। साथ ही, फेफड़े और किडनी जैसे संवेदनशील अंगों में संकà¥à¤°à¤®à¤£, उपचार पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ लंबी हो जाती है और लंबे समय तक बनी रहती है जब तक कि वे कà¥à¤› बेहतर परिणाम न दिखा दें।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के इलाज की कीमत कà¥à¤¯à¤¾ है?
उपचार की लागत पूरी तरह से सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ और कारण पर निरà¥à¤à¤° करती है। हलà¥à¤•े संकà¥à¤°à¤®à¤£ के मामले में, केवल परामरà¥à¤¶ शà¥à¤²à¥à¤• और चिकितà¥à¤¸à¤¾ खरà¥à¤š का संबंध है, जबकि दूसरी ओर, गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के लिà¤, उपचार महंगा है।
कà¥à¤¯à¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के परिणाम सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ हैं?
अधिकांश मानव रोग में संकà¥à¤°à¤®à¤£ से संबंधित à¤à¤• अंतरà¥à¤¨à¤¿à¤¹à¤¿à¤¤ कारण होता है। हालांकि, उनमें से अधिकांश का इलाज किया जा सकता है और ठीक किया जा सकता है बशरà¥à¤¤à¥‡ कि इसका सही समय पर निदान हो और सटीक उपचार के संपरà¥à¤• में आà¤à¥¤
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार के विकलà¥à¤ª कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
निःसंदेह पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपचार बीमारी का इलाज करने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है। वे बिना किसी दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के उपचार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। अदरक, शहद, तेल अजवायन, कोलाइडल चांदी, इचिनेशिया किसी à¤à¥€ दवा पर सबसे अचà¥à¤›à¤¾ उपचार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाले कà¥à¤› पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक ततà¥à¤µ हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ से होने वाले रोगों के उपचार में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वसà¥à¤¤à¥ अतà¥à¤¯à¤‚त सहायक है। पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का इलाज करने के लिठये पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक वसà¥à¤¤à¥à¤à¤‚ सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® हैं, जबकि घातक मामलों में इस पर तà¥à¤°à¤‚त नियंतà¥à¤°à¤£ पाने के लिठदवा की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
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